Published On: Sat, Feb 2nd, 2019

पानी को लेकर बनेंगे तीसरे विश्व युद्ध के हालात: वर्मा

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 भोपाल। पर्यावरण एवं लोक निर्माण मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा है कि हम अब भी जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों को नहीं समझेंगे, तो दुनिया में पानी को लेकर तीसरे विश्व युद्ध के हालात बनेंगे। इसलिये जल संरक्षण पर विशेष ध्यान देना नितांत आवश्यक हो गया है। पर्यावरण मंत्री आज यहाँ एप्को परिसर में ”वेटलैण्डस एण्ड क्लाइमेट चेंज” पर केन्द्रित कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने स्कूली बच्चों और कॉलेज के छात्रों की ड्राइंग और ओपन क्विज प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को पुरस्कार भी वितरित किये।

मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि वेटलैण्ड कई तरह से उपयोगी है। वेटलैण्ड वास्तव में झील, नदी, तालाब, जलाशय, डेम और नमीयुक्त नदी तथा समुद्र किनारे का हिस्सा होता है। यह जल को प्रदूषित होने से बचाता है। वेटलैण्ड अन्य महत्वपूर्ण उपयोगों के साथ-साथ भू-जल तथा वातावरण से कार्बन डाई-ऑक्सईड अवशोषित कर जलवायु परिवर्तन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि जल को सहेजने एवं संरक्षित रखने के उपाय हमारे संस्कारों एवं शिक्षा में हमेशा से मिलते रहे हैं। दुर्भाग्य यह है कि हमारे जलीय संसाधन दिनों-दिन नष्ट और प्रदूषित हो रहे हैं। कहीं न कहीं हम सब इसके लिए जिम्मेदार हैं। श्री वर्मा ने कहा कि हमें इन महत्वपूर्ण जलीय संसाधनों को पुनर्जीवित करने तथा इनका संरक्षण करने की जिम्मेदारी उठानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जलीय संसाधन प्रकृति और ईश्वर की अनमोल धरोहर तथा मानव जीवन का आधार है। यदि जल को सहेजने वाले संसाधन नष्ट हुए, तो समझ लीजिए कि मानव-जीवन के साथ अन्य जीवन भी नष्ट हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में केन्द्र सरकार के पर्यावरण और जल संरक्षण की दिशा में जारी दिशा-निर्देशों का सकारात्मकता के साथ पालन किया जायेगा। राज्य स्तर पर जलीय संसाधनों को संरक्षित करने के लिये हरसंभव प्रयास किये जायेंगे। मंत्री श्री वर्मा ने वेटलैण्ड इन्वेन्ट्री तथा पोर्टल तैयार करने के लिये एप्को के प्रयासों की सराहना की।

प्रमुख सचिव पर्यावरण श्री अनुपम राजन ने बताया कि जलवायु परिवर्तन से हमारी कृषि व्यवस्था प्रभावित हुई है। इसका असर दुनिया के कई देशों की जीडीपी पर भी पड़ा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में स्थित शहरी तालाबों में वेटलैण्ड के संरक्षण की योजना चल रही है। केन्द्र सरकार से स्वीकृत योजनाओं में वर्तमान में 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार द्वारा वहन की जा रही है।

एप्को के एक्जीक्यूटिव डॉयरेक्टर श्री जितेन्द्र सिंह राजे ने बताया कि वेटलैण्ड दिवस के अवसर पर इस वर्ष भी एप्को द्वारा वेटलैण्ड्स एवं जलवायु परिवर्तन विषय पर जन-जाग्रति कार्यक्रम किये गए, जिनमें विद्यालयीन एवं महाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि राज्य वेटलैण्ड प्राधिकरण, एप्को द्वारा इसरो, अहमदाबाद एवं मैप-आईटी, भोपाल से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर राज्य में स्थित 2.25 हेक्टेयर से बड़े वेटलैण्ड्स की सूची तैयार कर डिजिटल इन्वेन्ट्री तथा वेब पोर्टल तैयार किया गया है। डिजिटल इन्वेन्ट्री में 2.25 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाले मध्यप्रदेश में 15 हजार 152 वेटलैण्ड्स हैं। यह राज्य के कुल क्षेत्रफल का 1.74 प्रतिशत है। इनकी तमाम प्रक्रिया करके अधिसूचना के प्रस्ताव राज्य शासन को भेजे जा रहे हैं।

कार्यक्रम में बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय भोपाल के पूर्व कुलपति डॉ. रामप्रसाद और पर्यावरण विज्ञान के प्रो. प्रदीप श्रीवास्तव भी मौजूद थे।

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