Published On: Mon, Aug 14th, 2017

पासपोर्ट दफ्तर बढ़ने के साथ बढ़ने लगीं समस्याएं

passport_officeप्रदेश में पासपोर्ट बनवाने के लिए जिलों में कार्यालयों की संख्या बढ़ने के साथ ही लोगों की समस्याओं की संख्या भी बढ़ने लगी है। नीतिगत मामला, पुलिस वेरिफिकेशन अथवा आवेदन में आई किसी खामी को दुरुस्त करने के लिए भोपाल ही आना पड़ता है। ऐसे पैंडिंग मामलों को सुलझाने के लिए अंतिम मौका देने के लिए अगले महीने भोपाल में पासपोर्ट अदालत का आयोजन किया जा रहा है।

पासपोर्ट विभाग के सूत्रों का कहना है कि ऐसे मामले जो अदालत में हैं। पासपोर्ट रिनूवल (अब री इशू), नाम में स्पेलिंग संबंधी त्रुटि, सिंगल पेरेंट्स एवं अन्य विवाद को लेकर जो मामले पेंडिंग हैं उन्हें पासपोर्ट अदालत में सुलझाने का अवसर दिया जाएगा। बताया जाता है कि इस तरह के मामलों में विभागीय स्तर पर अब तक करीब 250 प्रकरण पासपोर्ट आफिस में पैंडिंग हो गए हैं। आवेदकों को ज्यादातर मामलों में विदेश मंत्रालय की ओर से नोटिस अथवा पत्र आदि भेजे जा चुके हैं।

विदेश मंत्रालय ने हर 50 किलोमीटर पर पासपोर्ट सेवा केन्द्र खोलने की योजना बनाई है। इसके लिए पहले चरण में प्रदेश के चार जिलों के मुख्य पोस्ट ऑफिस में पासपोर्ट सेवा केन्द्र खोले जा चुके हैं। दूसरे चरण में 9 अन्य जिलों का चयन किया जा चुका है जहां कार्यालय खोलने की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा इंदौर में विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट का लघु सेवा केन्द्र खोल दिया है जहां सहायक पासपोर्ट अधिकारी तैनात किया गया है। विभाग का कहना है कि प्रदेश के कुछ और दूरस्थ जिलों में भी पासपोर्ट सेवा केन्द्र खोलने की तैयारी चल रही है।

नीतिगत मामलों पर होगी चर्चा

डाकघर में शुरू किए गए पासपोर्ट सेवा केन्द्रों में इस तरह की नीतिगत समस्याओं का निराकरण नहीं हो पाता। इसलिए सभी आवेदकों को भोपाल में क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी के पास ही जाना पड़ता है। पासपोर्ट अधिकारी मनोज कुमार राय ने बताया कि पैंडिंग मामलों को सुलझाने के लिए सितंबर में पासपोर्ट अदालत लगाने का निर्णय किया गया है। इस दौरान जो भी मामले रखे जाएंगे सभी का मौके पर ही निपटारा कर दिया जाएगा।

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