Published On: Sat, Aug 11th, 2018

भारतीय कोच होने से टीम को मिला बड़ा फायदा, जानिए कैसे

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भारतीय हॉकी टीम के सीनियर खिलाड़ियों सरदार सिंह और मनप्रीत सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय टीम का मुख्य कोच भारतीय होने से अब बातचीत को लेकर कोई दिक्कत नहीं होती है और रणनीतिक तौर पर हरेंद्र सिंह किसी विदेशी कोच से कम नहीं हैं। हरेंद्र को मई में हॉकी टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया गया था। उनके रहते हुए भारतीय टीम पिछले महीने चैंपियन्स ट्रॉफी में लगातार दूसरे साल उप-विजेता रही थी।

सरदार ने कहा, ‘मुझे अब भी याद है कि हरेंद्र पाजी ने 15-16 साल पहले मुझे राष्ट्रीय शिविर में बुलाया था। हम लंबे समय से एक दूसरे को जानते हैं। जब वो 2009 में जोस ब्रासा के साथ सहायक कोच थे तब भी मैं खेला था।’ उन्होंने कहा, ‘एक भारतीय कोच के साथ काम करना अलग तरह का अहसास है। हम उनके साथ कुछ भी चर्चा कर सकते हैं। वो हमें खुलकर सलाह देते हैं और जानते हैं कि सीनियर खिलाड़ी होने के कारण हम अपना खेल पूरी तरह से नहीं बदल सकते हैं।’

‘भारतीय कोच होने से मिला टीम को फायदा’

अभ्यास के दौरान बात समझाने के लिए कोच के पास समय होता है लेकिन विदेशी कोच की दो क्वॉर्टर के बीच दो मिनट के ब्रेक के दौरान सलाह को समझना मुश्किल होता है। यहां पर हरेंद्र ने बड़ा अंतर पैदा किया। सरदार ने कहा, ‘अगर आप देखोगे तो उन्होंने महिला टीम और जूनियर टीम के साथ भी अच्छे परिणाम दिए हैं। जूनियर टीम ने विश्व कप उनके रहते हुए ही जीता। उन्होंने सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षकों के साथ काम किया है। उनके आने से सबसे बड़ा सकारात्मक पहलू यह रहा कि अब हिन्दी में बातचीत करते हैं।

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