Published On: Mon, Feb 20th, 2017

रमजान में बिजली आती है तो दिवाली पर भी आनी चाहिए: फतेहपुर में बोले मोदी

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modi-1-नरेंद्र मोदी रविवार को यहां बीजेपी के 6 कैंडिडेट के समर्थन में विजय शंखनाद रैली की। उनके निशाने पर सपा-कांग्रेस का अलायंस, राहुल-अखिलेश रहे। मोदी ने कहा, “किसी भी सरकार को धर्म और जाति के आधार पर जनता में भेदभाव नहीं करना चाहिए, सबका साथ-सबका विकास हमारा मंत्र है। रमजान में बिजली आती है तो दिवाली में भी आनी चाहिए। भेदभाव नहीं होना चाहिए।” मोदी ने यह भी कहा, “यूपी में विकास के वनवास को 14 साल हो गए हैं। इसे खत्म होना चाहिए। सपा सरकार के मंत्री पर एफआईआर दर्ज करवाने को लेकर तो सुप्रीम कोर्ट को डांट तक लगानी पड़ी।

जनता दूध का दूध, पानी का पानी कर देती है…
 मोदी ने कहा, “सरकारी खजाने से धन लुटाकर, टीवी-अखबारों में छाए रहने से, प्रचार में पैसा खर्च करके एसपी सरकार ने सोचा था कि लोगों की आंखों में ऐसी धूल झोंकेंगे कि लोग दूसरा कुछ देख ही नहीं पाएंगे।””ये जनता है सबकुछ जानती है। जनता बड़ी आसानी से दूध का दूध पानी का पानी कर लेती है।” “आपके इरादे नेक हैं कि नहीं, नीयत साफ है कि नहीं, नीतियां ठीक हैं कि नहीं, प्राथमिकताएं उचित हैं कि अनुचित, ये जनता भलीभांति समझ लेती है।”  “कुछ लोगों को लगा कि सब जगह तो पिट गए, यूपी में शायद अपने पुरखों के नाम पर बच जाएं।” “सुप्रीम कोर्ट को यूपी की सरकार को डांटना पड़ा कि अपने मंत्री गायत्री प्रजापति पर एफआईआर करो।” “रेप पीड़िता और उसकी मां को न्याय पाने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। क्या आपने मां-बेटी की इज्जत लूटने के लिए सरकार बनाई थी? ये काम है या कारनामा।”
‘दो डूबते लोगों ने एक-दूसरे का हाथ पकड़ा’
– “जिन्होंने तेज धूप नहीं देखी, रात में गांव कैसा होता है नहीं देखा, सोने की चम्मच लेकर पैदा हुए थे जो लोग। 27 साल यूपी बदहाल, गांव-गांव गए लेकिन कुछ नहीं हुआ।”
– “दो लोगों ने सोचा कि तू भी डूब रहा है और मैं भी डूब रहा हूं, चलो हाथ पकड़ लें शायद बच जाएं।”
– “जब हाथ पकड़े तो पहले ही दिन पता चला कि रास्ता बड़ा कठिन है। पहले दिन रथ पर निकले तो तार लटके थे रास्ते में, अखिलेश जी नहीं कांप रहे थे, लेकिन दूसरे साथी डर रहे थे कि कहीं करंट ना लग जाए। अखिलेश जी नहीं डर रहे थे, उन्हें पता था कि तार है पर बिजली कहां है।”
‘अब अखिलेश की आवाज में दम नहीं रहा’
– “पहले सपा वाले कहते थे कि दो तिहाई से ज्यादा बहुमत लेकर आएंगे, थोड़े दिन बाद ये कहना बंद कर दिया। फिर कहते हैं कि अब हम दोनों लोग मिल गए हैं और भारी बहुमत लेकर आएंगे।”
– “आज श्रीमान अखिलेश जी मतदान करने गए थे, उसके बाद जब टीवी पर सुबह देखा तो चेहरा लटक गया था और आवाज में दम नहीं था। डरे हुए थे, शब्द खोज रहे थे, जैसे बाजी हार चुके हैं।”
– “चुनाव के शुरू में अकेले जीतेंगे कहते थे, फिर कहते थे कि समझौता किया इसलिए जीतेंगे, अब आज सुबह कह रहे हैं कि हमारी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनेगी ही। क्या हुआ, हौसले कैसे पस्त हो गए।”
– “कारण ये है कि जनता जनार्दन है। देश गलतियों को तो माफ करता है, लेकिन प्रजा के साथ धोखा, ये देश कभी नहीं माफ करता है।”

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