Published On: Wed, Jun 19th, 2019

शिव-राज के खिलाफ आंदोलन करने वालों को तोहफा,हड़ताल अवधि को अवकाश मानने के नाथ सरकार ने दिए निर्देश

भोपाल। प्रदेश में पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार के दौरान अपनी मांगों को लेकर हड़ताल करने वाले कर्मचारी संगठनों को कमल नाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने न केवल माफ कर दिया है बल्कि उनकी हड़ताल अवधि को अवकाश में तब्दील करने का तोहफा भी दे दिया है।
पंद्रह साल तक मध्यप्रदेश में राज करने वाली भाजपा सरकार के तीसरे कार्यकाल में सबसे ज्यादा कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन किए थे। अपनी मांगों को लेकर कुछ संगठनों ने लंबी हड़ताल भी की थी। अब सरकार ने इन कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान ली गई जबरिया छुट्टी को अर्जित और अन्य देय अवकाश में तब्दील करने का निर्णय लिया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा इस संबंध में आदेश जारी होने के बाद विभागों में हड़ताल अवधि को अवकाश के तौर पर स्वीकृत करने की कार्यवाही भी शुरू हो गई है। जिससे कर्मचारी आंदोलन के दौरान दफ्तर न जाने और सरकार का विरोध जताने का भी अर्जित अवकाश की तरह फायदा उठा सकेंगे। कमल नाथ सरकार की इस कवायद को कर्मचारी संगठनों को साधने का जतन माना जा रहा है। विधानसभा चुनाव 2003 में जिस तरह कर्मचारियों ने तत्कालीन दिग्विजय सिंह सरकार के खिलाफ माहौल बनाया था, उसका फायदा भाजपा को मिला था। यही स्थिति शिवराज सिंह सरकार में भी रही। कर्मचारी संगठनों ने पिछले पांच साल के दौरान सरकार के खिलाफ खूब मोर्चा खोला। उनकी नाराजगी का ही असर रहा कि राजधानी की कर्मचारी बहुल दक्षिण पश्चिम सीट पर भाजपा सरकार में मंत्री रहे उमाशंकर गुप्ता तक को पराजय झेलनी पड़ी थी।
सबसे ज्यादा इंजीनियरों को फायदा
बीते पांच सालों में जिन संगठनों ने हड़ताल की, उनमें सबसे ज्यादा समय तक इंजीनियरों ने बंक मारा है। मप्र डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन के बैनर तले साल 2017 से 2018 के दौरान कल 44 दिन हड़ताल की गई। इसके बाद अध्यापक संघ का नंबर आता है, जिसने 19 दिन हड़ताल की। मप्र राजस्व निरीक्षक संघ ने 12 दिन काम नहीं किया। मप्र सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी संघ ने एक दिन काम बंद रखा तो बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने दस दिन हड़ताल की थी।

Spread the love

About the Author

Leave a comment

You must be Logged in to post comment.