Published On: Mon, May 21st, 2018

‘हम छू लेंगे आसमां’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बेहतर भविष्य के दिए टिप्स

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भोपाल।माता-पिता की इच्छा थी बायोलॉजी से पढ़ाई करूं और डॉक्टर बनूं। मुझे मेढ़क की चीर-फाड़ से डर लगता था। प्रेक्टिकल के दौरान मैं घबराने लगता था। तभी मुझे विश्वास हो गया था कि मैं डॉक्टर नहीं बन सकता। मुझे मजदूरों की मदद करना, उनके लिए आवाज उठाना पसंद था। यही कारण है मेरा दर्शन शास्त्र में मन लगता था। जब मैं मॉडल स्कूल में था, तब भी यहां का छात्र नेता था। छात्रों की परेशानी से लड़ने के लिए हमेशा आगे खड़ा रहता था। इमरजेंसी के दौरान मुझे जेल में डाल दिया गया। जब वहां से निकला तो फिर राजनीति में उतर गया। आज मुझे इस बात की खुशी है कि मैं जरूरतमंदों की सेवा कर पा रहा हूं। इसलिए, हमेशा अपने व्यक्तित्व और रुचि के अनुसार विषय और कॅरियर का चयन करें। माता-पिता बच्चों पर अपनी खुशी थोपने के बजाय बच्चों को अपनी रुचि के क्षेत्र में आगे बढ़ने दें। यह समझाइश व सुझाव मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के बच्चों की दी।

मुख्यमंत्री ने टीटी नगर स्थित मॉडल स्कूल में सोमवार को आयोजित कार्यक्रम ‘हम छू लेंगे आसमां’ में शामिल हुए सात सौ से ज्यादा बच्चों को बेहतर भविष्य की राह दिखाई। साथ ही उन्होंने भोपाल के अलावा प्रदेश भर से आए कॉल पर कॅरियर काउंसलिंग भी की। उन्होंने बच्चों को ‘कर्म करो, फल की चिंता मत करो’ सफलता का मूल मंत्र भी दिया। इस दौरान सीएम ने रोजगार संबंधित पोर्टल ुुु.र्सॅडियच.र्यिप.ैह का भी लोकार्पण किया।

अदिति को दिलाया भरोसा, कहा- नहीं रुकेगी भाई-बहन की पढ़ाई

दसवीं में 87 फीसदी अंक लाने वाली अदिति ठाकुर आर्मी अफसर बनना चाहती है, लेकिन अपनी बड़ी बहन और बड़े भाई के टूटते सपने को देखकर मायूस हो जाती है। पांच साल पहले जब वह पांचवीं कक्षा में थी, तभी उसके पिता का निधन हो गया। मां घर पर ही रहती हैं। ऐसे में तीन बहन और एक भाई की पढ़ाई मुश्किल हो गई। अदिति की बड़ी बहन अंजलि 12वीं में 56 फीसदी अंक और भाई अमन 74 फीसदी अंकों के साथ पास हुए, लेकिन सरकारी कॉलेज में दाखिला नहीं मिला। कम अंकों और कॉलेज की फीस के पैसे नहीं होने के कारण उन्हें मजबूरी में आगे की पढ़ाई छोड़ना पड़ी। एक साल से दोनों घर पर बैठे हैं। क्या आप कोई मदद करेंगे। यह हकीकत बयां करते ही अदिति फफक पड़ी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अंकों और पैसों की कमी के कारण बड़े भाई-बहन की पढ़ाई नहीं रुकने का उसे आश्वासन दिया।

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