Published On: Mon, Feb 20th, 2017

2 लाख से ज्यादा की ज्वैलरी कैश खरीदने पर देना होगा 1% टैक्स, अभी 5 लाख है लिमिट

Share This
Tags
jewe-11 अप्रैल 2017 से दो लाख रुपए से ज्यादा कैश देकर ज्वैलरी खरीदने वालों को 1% टैक्स चुकाना पड़ेगा। यह टैक्स कलेक्शन ऑन सोर्स (TCS) कहलाएगा। फाइनेंस बिल 2017 में इसका प्रावधान है। अभी कैश पर टीसीएस की लिमिट सामान्य चीजों के लिए 2 लाख और ज्वैलरी के लिए 5 लाख रु. है। फाइनेंस बिल में ज्वैलरी को सामान्य वस्तुओं (जनरल गुड्स) की कैटेगरी में डाला गया है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के एक अफसर ने यह जानकारी दी।
बजट में 3 लाख से ज्यादा कैश लेनदेन पर भी रोक लगाने का प्रपोजल…
– बजट में 3 लाख रु. से ज्यादा कैश लेनदेन पर भी रोक लगाने का प्रपोजल है। नियम तोड़ने पर कैश लेने वाले को पूरी रकम पर 100% जुर्माना लगेगा।
– इस बीच जयपुर सराफा ट्रेडर्स कमेटी के एक पदाधिकारी के मुताबिक शायद ही किसी ज्वैलर ने पुराने नियम के तहत अभी तक टीसीएस दिया हो।
– सोना और ज्वैलरी पर टीसीएस का नियम 1 जुलाई 2012 से लागू है।
बुलियन के रूप में सोना (बिस्किट, बार) खरीदने पर दो लाख रुपए से ज्यादा कैश पर 1% टीसीएस लगता है।
– ज्वैलरी के लिए यह लिमिट 5 लाख रुपए है।
– 2016-17 के बजट में वस्तुओं और सेवाओं की दो लाख रु. से ज्यादा की कैश खरीद पर 1% लगा दिया गया था। इसमें ज्वैलरी को भी शामिल किया गया था।
– लेकिन ज्वैलर्स की करीब डेढ़ महीने की हड़ताल के बाद सरकार ने इसे वापस ले लिया और ज्वैलरी पर 5 लाख की सीमा बरकरार रही।
खरीदारी पर होगा असर
– 2 लाख रु. से ज्यादा कीमत वाली ज्वैलरी की कुल बिक्री करीब 40% होती है। इनकी बिक्री घट सकती है।
– 30 हजार रु. प्रति 10 ग्राम (एक तोला) के हिसाब से 65 ग्राम से ज्यादा की ज्वैलरी बिक्री पर असर होगा।
– ज्वैलर्स इससे ज्यादा वजन वाले गहने पहले से बनाकर नहीं रखेंगे, बल्कि ऑर्डर पर ही बनाएंगे।

सोने की चूड़ियों और चेन की बिक्री ज्यादा
– 2015-16 में 57 हजार करोड़ रु. की गोल्ड ज्वैलरी का एक्सपोर्ट हुआ।
– अंगूठी की बिक्री 5-15%, ईयर

About the Author

Leave a comment

You must be Logged in to post comment.

वीडियो